नई EV कार लेना हमेशा एक खास पल होता है, लेकिन डिलीवरी के समय ज़रा सी लापरवाही आगे चलकर दिक्कतें खड़ी कर सकती है। इसलिए यहाँ 20 जरूरी बातें दी गई हैं, जिन्हें अगर आप चेक कर लें, तो आपकी पहली EV बिल्कुल बिना टेंशन के मिल जाएगी।
सबसे पहले बैटरी हेल्थ ज़रूर देखें
EV में इंजन नहीं होता, बैटरी ही सबकुछ है। इसलिए बैटरी हेल्थ %, बैटरी का टेम्परेचर और उसकी कंडीशन डीलर से चेक करवाएँ।
कार में कितना चार्ज है, यह ज़रूर चेक करें
कम से कम 60–80% चार्ज के साथ कार दी जानी चाहिए, ताकि आप आराम से घर तक जा सकें।
चार्जिंग केबल और सारी एक्सेसरीज़ मिल रही हैं या नहीं
होम चार्जर, मोबाइल चार्जिंग केबल, टूलकिट, जैक, टायर रिपेयर किट—ये सब चीजें आपको साथ में मिलनी चाहिए। एक-एक करके चेक कर लें।
कार का मोबाइल ऐप वहीं सेटअप करवा लें
ऐप में रेंज, लॉक/अनलॉक, चार्जिंग स्टेटस और अन्य फीचर सही दिख रहे हैं या नहीं—एक बार चेक ज़रूर करें।
कार की फास्ट चार्जिंग सपोर्ट की जानकारी लें
कौन-कौन से फास्ट चार्जर (30kW / 60kW / 120kW) ये कार सपोर्ट करती है, यह डीलर से साफ-साफ पूछें।
आपका होम चार्जर कब इंस्टॉल होगा, यह तारीख फाइनल कर लें
वायरिंग, MCB, बिजली का लोड—सब होम चार्जर के लिए जरूरी है। इसकी इंस्टॉलेशन डेट लिखित में लें।
छोटी सी टेस्ट ड्राइव ज़रूर लें
रेंज, पिकअप, ब्रेक, रीजेन ब्रेकिंग—सब अपने हिसाब से चेक करें। कार कहीं खिंचती या आवाज़ तो नहीं कर रही।
अगर कार में ADAS है तो डेमो ज़रूर लें
AEB, 360 कैमरा, Lane Assist, Blind Spot—ये फीचर कैसे काम करते हैं, एक बार दिखवा लें।
सेफ्टी फीचर्स की पूरी जांच करें
एयरबैग कितने हैं, ABS काम कर रहा है, TPMS सही दिखा रहा है या नहीं—ये सब जरूरी चीजें हैं।
मोटर की आवाज़ और स्मूदनेस चेक करें
EV में आवाज़ बहुत कम होती है। अगर कोई अनचाही आवाज़ आ रही है तो तुरंत बताएं।
बॉडी, पेंट और पैनल गैप अच्छी तरह देखें
डेंट, खरोंच, या असमान पैनल गैप हों तो उसी समय बताएं। बाद में बदलवाना मुश्किल होता है।
टायर कितने महीने पुराने हैं, यह भी देख लें
टायर पर DOT नंबर होता है। कोशिश करें कि टायर ज्यादा पुराने न हों (5–6 महीने से ज़्यादा नहीं)।
कार के सभी फीचर एक-एक करके चेक करें
हेडलाइट, इंडिकेटर, वाइपर, विंडो, सनरूफ, सेंसर, डोर लॉक—सब का सही से काम करना जरूरी है।
इंफोटेनमेंट सिस्टम को पूरी तरह टेस्ट करें
ब्लूटूथ कनेक्ट हो रहा है या नहीं, Android Auto / CarPlay चल रहा है या नहीं, कैमरा क्लियर दिख रहा है या नहीं—सब चेक करें।
बैटरी और मोटर की वॉरंटी पेपर ध्यान से पढ़ें
ज्यादातर कंपनियाँ 8 साल / 1.6 लाख किमी की बैटरी वॉरंटी देती हैं। मोटर और चार्जर की वॉरंटी भी नोट कर लें।
बिल में कोई हिडन चार्ज तो नहीं
Handling charge या accessories का जबरदस्ती लगाया हुआ चार्ज तो नहीं—ये अच्छी तरह देखें।
कार का सॉफ्टवेयर अपडेट लेटेस्ट हो
कई बार कार पुराने सॉफ्टवेयर के साथ दी जाती है। BMS और सिस्टम अपडेट वहीं करवा लें।
बुकिंग वाले VIN नंबर और डिलीवरी वाले VIN नंबर मिलाएँ
कभी-कभी अलग गाड़ी दे दी जाती है। VIN नंबर मैच करना बहुत जरूरी है।
कार में मिलने वाले सेफ्टी आइटम चेक करें
First-aid kit, Warning triangle, Fire extinguisher (कई EV में जरूरी) – सब मिलना चाहिए।
डीलर से PDI रिपोर्ट ज़रूर माँगें
PDI (Pre Delivery Inspection) पूरी होने पर आपको रिपोर्ट मिलती है। इससे पता चलता है कार 100% टेस्ट है।